भोपाल. न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) द्वारा भारत को परमाणु व्यापार की छूट देने का सबसे ज्यादा फायदा परोक्ष रूप से भोपाल को ही होगा, क्योंकि यहां भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लि (भेल) की यूनिट में ही परमाणु बिजली घर बनाने में लगने वाली टरबाईन और अन्य उपकरण बनेंगे।
वर्तमान में यहां 235 मेगावाट तक के परमाणु बिजली घरों में लगने वाली टरबाईन और उसके उपकरण तैयार किए जा रहे हैं,लेकिन इस यूनिट की क्षमता 700 मेगावाट तक के लिए टरबाईन बनाने की है।
इस एटमी डील पर एनएसजी की सहमति बनने के बाद परमाणु बिजली घरों के लिए ईधन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। न्यूक्लियर पावर कापरेरेशन और भेल के बीच संयुक्त रूप से परमाणु बिजली घर बनाने का करारनामा हो चुका है। इस करारनामे के बाद किसी भी दिन एक संयुक्त क्षेत्र की कंपनी की घोषणा हो जाएगी। सूत्रों ने बताया कि टरबाईन और अन्य उपकरण भेल की भोपाल यूनिट में और जनरेटर हरिद्वार में बनेंगे।
एटमी डील आगे बढ़ने से देश में परमाणु बिजली घर लगाने की गति में तेजी आएगी। उसी के अनुसार भेल भोपाल को भी 540 और 700 मेगावाट की यूनिट के लिए टरबाईन तैयार करना होगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करने होंगे। एक हजार और 1600 मेगावाट की यूनिट के लिए अलग से एक ब्लॉक बनाना होगा।
भेल लगाएगा पावर प्लांट-
जिस तरह भेल थर्मल पावर प्लांट लगाने का ठेका ले रहा है,भविष्य में वह परमाणु पावर प्लांट लगाने के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाएगा। सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ तो भेल का आने वाले कई वर्र्षो तक परमाणु बिजली घर लगाने के मामले में एकाधिकार रहेगा।
मौजूदा हालात
देश में एक दर्जन परमाणु बिजली घर हैं,लेकिन ईंधन न मिलने के कारण वे क्षमता के मुताबिक उत्पादन नहीं दे पा रहे हैं। डील आगे बढ़ने से ईंधन मिलने का रास्ता खुलने के बाद देश में बड़े परमाणु बिजली घर लगने लगेंगे।
फायदा क्या
भेल भोपाल में टरबाईन और अन्य उपकरण बनने से मप्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और टैक्स के रूप में आमदनी होगी। ज्यादा आर्डर मिलने की स्थिति में भोपाल यूनिट को स्टाफ और यूनिट का विस्तार करना होगा।
एटमी डील आगे बढ़ने से भेल भोपाल को टरबाईन और अन्य उपकरण बनाने के आर्डर मिलेंगे। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और सहायक उद्योगों को इसका लाभ मिलेगा।
-आरके सिंह कार्यपालक निदेशक बीएचईएल,भोपाल।
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